धारा 370 क्या है ?

भारतीय  संविधान के अनुच्छेद 370 का इतिहास:

अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को और राज्यों के मुकाबले  कुछ  विशेष स्वायत्तता  प्रदान करता है।

महाराजा हरि सिंह, जो जम्मू और कश्मीर के राजा थे, चाहते थे कि इसे एक और स्विट्जरलैंड कहा जाए। वह जम्मू-कश्मीर का पाकिस्तान या भारत के साथ विलय नहीं करना चाहता था। लेकिन पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर पर धोखे से  हमला कर दिया और एक कमजोर सशस्त्र बल के कारण राजा हरि सिंह को भारत से मदद मांगने के लिए मजबूर होना पड़ा। भारत ने एक शर्त रखी की भारत तभी मदद करेगा  जब जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय होगा। परन्तु राजा हरी सिंह इससे पूर्णतः सहमत नहीं थी  इसलिए, महाराजा हरि सिंह और जवाहर लाल नेहरू के बीच एक समझौता हुआ। इस समझते के तहत जम्मू और कश्मीर का विलय भारत में होगा पर कुछ शर्तो के साथ।  26 अक्टूबर, 1947 को  संविधान में अनुच्छेद 370 (गोपालस्वामी अय्यंगार द्वारा लिखित) जोड़ा गया जिसके तहत जम्मू और कश्मीर के नागरिकों को एक विशेष विशेषाधिकार (special privilege) दिया गया।

भारत के संविधान का अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को विशेष अधिकार देता है जो हैं:

1. जम्मू और कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता है।

2.  जम्मू और कश्मीर विधान सभा की अवधि भारत के अन्य राज्यों की तुलना में 6 वर्ष की है।

3.  सुप्रीम कोर्ट का आदेश जम्मू-कश्मीर में मान्य नहीं होता  है।

4.  केवल कश्मीर का स्थायी निवासी ही कश्मीर में भूमि के  मालिक हो सकते  है। कश्मीर में किसी बाहरी व्यक्ति को जमीन खरीदने के इजाज़त नहीं है  ।

5.  जो महिला किसी  दूसरे भारतीय राज्य के पुरुष  से शादी करती है तो उसके पास अपनी कश्मीरी नागरिकता नहीं होगी। जबकि अगर वह एक पाकिस्तानी से शादी करती है, तो उसकी कश्मीरी नागरिकता बरक़रार रहेगी। 
 
6.  रक्षा, विदेशी मामलों और संचार को छोड़कर, अन्य सभी कानूनों को राज्य सरकार द्वारा पारित किया जाना है।

7.  संसद द्वारा पारित सभी विधेयकों को  राज्य सरकार द्वारा भी पारित किया जाना चाहिए तभी वो जम्मू और कश्मीर में लागू  होगा। 

उदाहरण के लिए , कश्मीरी नागरिकों द्वारा RTI दाखिल नहीं की जा सकती क्योंकि RTI बिल राज्य सरकार द्वारा पारित नहीं किया गया है।

8   आपातकाल ( Emergency) केवल बाहरी आक्रमण के मामले में ही  लगाया जा सकता है।

9.  कश्मीर की महिलाओं के लिए शरीयत कानून लागू है।

10.  कश्मीर में  आरटीई (RTI) लागू नहीं है।

11. अनुच्छेद 35 A के तहत  जम्मू-कश्मीर सरकार को बाहरी लोगों की तुलना में कश्मीरी नागरिकों को निम्नलिखित विभागों में  वरीयता देने की अनुमति देता है:

a)  राज्य सरकार के अधीन रोजगार
 b) राज्य में अचल संपत्ति का अधिग्रहण।
 c) राज्य में बसना।
 d) छात्रवृत्ति और ऐसे अन्य प्रकार के सहायता के अधिकार जो राज्य सरकार प्रदान 
    करती  है।

धारा 370 के लाभ :

   1 .  बाहरी लोगों के लिए कश्मीर में व्यवसाय स्थापित करना मुश्किल है, इसलिए कश्मीर के नागरिकों को यहां एक फायदा मिलता है क्योंकि वहां प्रतिस्पर्धा कम है और नागरिकों के लिए अधिक अवसर हैं।

2 .  दिल्ली एनसीआर के विपरीत, कश्मीर में अन्य राज्यों के लोगों के कम बसने  के कारण कश्मीर में कोई जनसंख्या विस्फोट नहीं हुआ है।

3 . स्थानीय ब्रांड अभी भी चल रहे हैं।

4 .  कम अपराध दर (लेकिन उच्च आतंकवाद)

धारा 370 की कमियां :

1.  चिकित्सा सुविधाओं की कमी क्योंकि निजी अस्पताल कम हैं और सरकारी अस्पतालों की हालत खराब है।

2.  रोजगार की कमी के कारण, युवा खुद को आतंकवाद में शामिल करते हैं।


3.  कोई औद्योगिक क्षेत्र उपलब्ध नहीं है।

4.  अन्य राज्यों की तुलना में जम्मू कश्मीर में भ्रष्टाचार अधिक है क्युकी यहाँ RTI लागु नहीं होता। 

5.  केवल मुसलमान ही जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बन सकते हैं। तो वहां धर्म के नाम पर राजनीति चलती है।

6.  खराब शिक्षा और निम्न जीडीपी।


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